Tuesday, October 13, 2020

Journey of Life

 1. मुसाफिर हूँ  यारो  न घर हे न ठिकाना मुझे  चलते जाना हे बस चलते जाना 

2.रुक जाना नहीं तू  कभी हार के ,कांटो पे चलके हे मिलेंगे तुझको साये बहार के ,ओ  राही ओ राही 

Thursday, September 24, 2020

भोजन

अगर  भोजन का असली स्वाद लेना है तो हर अन्न ,फल अवं सब्जी के उगने से लेकर हमारी थाली में आने तक की उसके पीछे लोगो की मेहनत का ध्यान करो फिर प्रभु अवं पृथ्वी माता का धन्यवाद् करके और उन्हें भोग लगाने के बाद प्रसाद स्वरूप भोजन ग्रहण करो फिर देखना तुम्हे कितना आनंद आएगा और उदर सहित आत्मा भी   तृप्त हो जाएगी | 

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